कभी सोचा नहीं ज़िन्दगी में ऐसा दौर भी होगा...
हर तरफ़ हंसी की झलक मगर सच कुछ और ही होगा।
वैसे तो सबसे घुलमिलके हम बन गए सबके खास...
इतनी इज़्ज़त कमा ली कि जा न सके किसी के पास।
दिल कितना भी बच्चा हो , हम हैं तो दुनिया के लिए बड़े...
न जाने कितनी रातें बिताई हैं हमने ये सोच में पड़े।
चांद को हर कोई देखता है और कहता है सुंदर...
पर अपना मानके लाते नहीं है घर के अंदर।
हमने दिल को समझाया कि तू बेकार ही उम्मीद में है...
न तू किसी के करीब है और वो न ही तेरे नसीब में है।
- गोदा रामकुमार
- गोदा रामकुमार
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