सुबह की चाय पीते सुने गाने की धुन से याद आ गए तुम।
दिन में दोस्तों से की हुई बातों से याद आ गए तुम।
शाम घर लौटते ही दीवार पे टगी तस्वीर से याद आ गए तुम।
रात के सैर की राहों में अनगिनत लम्हों में याद आ गए तुम।
तुम तो मुझसे पूछोगे
क्यों वो गाने सुनते हो?
उन बातों में क्यों खोते हो?
तस्वीर क्यों देखते हो?
उन राहों पे क्यों चलते हो?
हम तो इतना ही कह पाएंगे...
हम तो आपको महसूस करना चाहते थे
फिर हमें लगे कि शायद लौट आगए तुम।
- गोदा रामकुमार
दिन में दोस्तों से की हुई बातों से याद आ गए तुम।
शाम घर लौटते ही दीवार पे टगी तस्वीर से याद आ गए तुम।
रात के सैर की राहों में अनगिनत लम्हों में याद आ गए तुम।
तुम तो मुझसे पूछोगे
क्यों वो गाने सुनते हो?
उन बातों में क्यों खोते हो?
तस्वीर क्यों देखते हो?
उन राहों पे क्यों चलते हो?
हम तो इतना ही कह पाएंगे...
हम तो आपको महसूस करना चाहते थे
फिर हमें लगे कि शायद लौट आगए तुम।
- गोदा रामकुमार
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