Friday, 29 March 2019

जिस्म पर थोड़ी सी खरोच क्या अाई
आंसू बेरोक बहने लगे
झूठी मुस्कराहट के पीछे छिपे बूंदों को
आज़ादी जो मिल गई थी।

                                   - गोदा रामकुमार

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