वक़्त गुज़ारने की बात नहीं थी, एक झलक जो दिख गई
लफ़्ज़ों में कहने की बात नहीं थी, नज़रों से जो कह गई
सजने सवारने की बात नहीं थी, मुस्कराहट जो दे गई
जिस्म की बात नहीं थी, रूह तक जो पहुंच गई।
- गोदा रामकुमार
लफ़्ज़ों में कहने की बात नहीं थी, नज़रों से जो कह गई
सजने सवारने की बात नहीं थी, मुस्कराहट जो दे गई
जिस्म की बात नहीं थी, रूह तक जो पहुंच गई।
- गोदा रामकुमार
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