माना कि हमने साथ में कुछ ही पल गुज़ारे
पर दिल के बहुत ही करीब हैं पल वो सारे।
काश लौट आते वो पल जो हमने साथ में बिताए
दिमाग़ तो समझ ही गया है पर दिल को कौन समझाए।
दिल में ऐसी जगह बना ली आपने बातों ही बातों में
प्यार को और गहरा बना दिया कई मुलाकातों ने।
अब उन यादों में हम दिन रात जाग रहे हैं
समुंदर की लहरों की तरह खुद से ही भाग रहे हैं।
पर क्या लहरें समुंदर से बाहर निकल पाती हैं?
कोशिश में लगी बस वापस खींची जाती हैं।
- गोदा रामकुमार
पर दिल के बहुत ही करीब हैं पल वो सारे।
काश लौट आते वो पल जो हमने साथ में बिताए
दिमाग़ तो समझ ही गया है पर दिल को कौन समझाए।
दिल में ऐसी जगह बना ली आपने बातों ही बातों में
प्यार को और गहरा बना दिया कई मुलाकातों ने।
अब उन यादों में हम दिन रात जाग रहे हैं
समुंदर की लहरों की तरह खुद से ही भाग रहे हैं।
पर क्या लहरें समुंदर से बाहर निकल पाती हैं?
कोशिश में लगी बस वापस खींची जाती हैं।
- गोदा रामकुमार
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