हमारी नजरें टिकी रही उन पर
आंसुओं की बूदें छिपी रही पलकों पर
दिल से आवाज़ निकली थी उमड़कर
रुक जा ज़रा हमारे लिए पलभर
पर उन्होंने एक बार भी देखा नहीं मुड़कर।
वक़्त को हम कैसे कहते ठहर जा
हम उन्हें थोड़ी देर और देख लें।
ख्वाहिशें हमसे कहने लगी संभल जा
खुद को बिखरने से तू रोक ले।
वो नहीं रुके आगे चले गए
साथ में हमारा एक हिस्सा ले गए।
अब हम उनके बिना अधूरे लगते हैं
किस्मत के खेल में बस मोहरे लगते हैं।
- गोदा रामकुमार
आंसुओं की बूदें छिपी रही पलकों पर
दिल से आवाज़ निकली थी उमड़कर
रुक जा ज़रा हमारे लिए पलभर
पर उन्होंने एक बार भी देखा नहीं मुड़कर।
वक़्त को हम कैसे कहते ठहर जा
हम उन्हें थोड़ी देर और देख लें।
ख्वाहिशें हमसे कहने लगी संभल जा
खुद को बिखरने से तू रोक ले।
वो नहीं रुके आगे चले गए
साथ में हमारा एक हिस्सा ले गए।
अब हम उनके बिना अधूरे लगते हैं
किस्मत के खेल में बस मोहरे लगते हैं।
- गोदा रामकुमार
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