किसी को दोस्त मानना बहुत आसान है
बस मान लिया कि वो अपना है
पर जब जाना कि हमारी तो भीड़ में पहचान है
लगा कि दोस्त बनना एक सपना है
दोस्ती सिर्फ साथ की हुई मस्ती नहीं होती
एक दूसरे की बात को जानना है
दोस्त मानने में किसी की ज़बरदस्ती नहीं होती
वो तो खुद पर खुद मानना है
हम कितनी भी कोशिश कर लें करीब जाने की
थोड़ी सी दूरी तो रह ही जाती है
अब डोर ना पकड़े रहना एक झूठी उम्मीद की
किस्मत में जो मिलना है वो बिना कोशिश मिल ही जाती है
बस मान लिया कि वो अपना है
पर जब जाना कि हमारी तो भीड़ में पहचान है
लगा कि दोस्त बनना एक सपना है
दोस्ती सिर्फ साथ की हुई मस्ती नहीं होती
एक दूसरे की बात को जानना है
दोस्त मानने में किसी की ज़बरदस्ती नहीं होती
वो तो खुद पर खुद मानना है
हम कितनी भी कोशिश कर लें करीब जाने की
थोड़ी सी दूरी तो रह ही जाती है
अब डोर ना पकड़े रहना एक झूठी उम्मीद की
किस्मत में जो मिलना है वो बिना कोशिश मिल ही जाती है
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