खोई रहती हूं दिनभर खयालों में
उन यादों में छिपी तुम्हारी हर बात जो है।
छुपी रहती हूं दुनिया की नज़रों से
तन्हाई में तुम्हे महसूस करने की आस जो है।
चुप रह जाती हूं बिना बातों के
खामोशी में तेरे पास होने का अहसास जो है।
सोई रहती हूं आंखें मूंदकर
सिर्फ ख्वाबों में मिलने वाला तेरा साथ जो है।
उन यादों में छिपी तुम्हारी हर बात जो है।
छुपी रहती हूं दुनिया की नज़रों से
तन्हाई में तुम्हे महसूस करने की आस जो है।
चुप रह जाती हूं बिना बातों के
खामोशी में तेरे पास होने का अहसास जो है।
सोई रहती हूं आंखें मूंदकर
सिर्फ ख्वाबों में मिलने वाला तेरा साथ जो है।
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