Saturday, 28 December 2019

मैं तो तुम्हारी तरफ़ खींची जा रही हूं , एक दो कदम तुम भी चल लिया करो न
बातें शुरू तो हमेशा मैं ही करती हूं , एक बार हाल चाल तुम भी पूछ लिया करो न

मिलने के लिए तुम्हारी हां का इंतज़ार मैं ही क्यों करूं ? तुम भी आके मुझसे मिल लिया करो न
तुम्हे प्यार करने वाले बहुत होंगे दुनिया में,  फिर भी इस मोहब्बत की थोड़ी कदर कर लो न

मैं  जानती हूं इस प्यार का कोई अंजाम नहीं
तो क्या हो गया?  ऐसा तो नहीं  कि ये मोहब्बत नहीं?
एकतरफा है , आसान नहीं है
मेरे नहीं हो तो क्या हुआ , मेरे लिए थोड़ा आसान बना दिया करो न

बेमतलब है मेरा इश्क़ पर बेहद है,
कोई शर्त नहीं है बस छोटी सी उम्मीद है
तुम तो मेरे दिल में हो ही , अपनी यादों में थोड़ी जगह मुझे दे दिया करो न

तुम्हे हासिल तो कर नहीं सकती और न ही कोशिश है
तुम ज़िन्दगी में हो बस इसी बात से दिल खुश है
इस खुशी को महसूस करने के लिए अपने कुछ पल मुझे दे दिया करो न

मेरी तो यही दुआ है कि तुम्हे प्यार के बदले हमेशा प्यार मिले
तुम्हारी मुस्कराहट पल में मेरे चेहरे तक पहुंच जाती है
मुझे मुस्कराने का बहाना भी दे दिया करो न





Wednesday, 9 October 2019

लकीरों में नाम तो नहीं पर थाम तो लिया तुमने हाथ।
नाम शायद दे ना पाएं पर रिश्ता तो बन ही गया मेरे साथ।
लफ़्ज़ों में कहा नहीं पर नज़रें मिलीं  और इशारे मिले।
मदहोशी में ही सही हमने एक दूसरे को लगाया गले।
अब वहीं पल याद करके ज़िंदा होती हूं हर बार।
बेबसी की हालत में भी हूं में शुक्र गुज़ार।

Sunday, 18 August 2019

दूरियां

ये दूरियां ना होती
तो तुम्हारी यादों में डूबना नसीब ना होता
तुम्हारे खयालों में आने का मौका ना मिलता
तुम्हारे करीब आने का बहाना ढूंढना ना पड़ता
तुम मेरे लिए क्या हो ये कभी समझ ना आता।

Tuesday, 2 July 2019

तू जो है

खोई रहती हूं दिनभर खयालों में
उन यादों में छिपी तुम्हारी हर बात जो है।

छुपी रहती हूं दुनिया की नज़रों से
तन्हाई में तुम्हे  महसूस करने की आस जो है।

चुप रह जाती हूं बिना बातों के
खामोशी में तेरे पास होने का अहसास जो है।

सोई रहती हूं आंखें मूंदकर
सिर्फ ख्वाबों में मिलने वाला तेरा साथ जो है। 

Saturday, 1 June 2019

मुझे पसंद है वो


खयालों की अपनी दुनिया में रहता है बेखबर
शिकायत है मुझे कि मुझपे पड़ती नहीं उसकी नज़र
पर मुझे पसंद है वो

जब  मुझे वो जानता नहीं  था,  लगता था उसे तनहाई से प्यार है
जब जान गया तो लगा ,भला क्या उससे अच्छा कोई यार है?
तभी तो मुझे पसंद है वो

समझता तो है सब कुछ वो , पर दिखता है बड़ा बेफिकर
सवाल उठ जाते हैं मन में क्या मेरी है भी कुछ कदर
पर मुझे पसंद है वो

बातें कम ही करता है, हर एक की राय सुनकर मौन है
बोलता है अगर तो या तो बहुत ही ज़रूरी है या फिर  दो तीन पैग डॉउन है
पर मुझे पसंद है वो

प्यार जताओ तो बेचैन सा हो जाता है जैसे प्यार की आदत न हो
प्यार की बातों को नज़रंदाज़  कर देता है कि किसी को उससे उल्फत न हो
पर मुझे पसंद है वो

आवाज़ में उसकी मिठास है , रंग भरने का, महसूस करने का  अंदाज़ है
नाच में उसकी जुनूनियत और गाने में अलग अहसास है
हां मुझे पसंद है वो

बार बार उससे बातें करने की  कोशिश की आदत सी हो गई है
एक बार मिलने के बाद फिर मिलने की उम्मीद जरूरत सी बन गई है
हां  मुझे पसंद है वो

अल्फाजों में दिल खोलकर रख भी दिया मैंने,  तो भी उससे मिलेगी सिर्फ खामोशी
ये मैं जानती हूं , और ऐसा करने की मेरे पास हिम्मत भी नहीं
बेमतलब ही सही , पर मुझे पसंद है वो








Wednesday, 22 May 2019

दुआ करो कि कभी ना इस बुलंद मोहब्बत हो जाए
आप उसकी सिर्फ पसंद और वो जरूरत बन जाए।

Saturday, 4 May 2019

हम उनसे प्यार करते थे और वो हमारी इज्जत
इज्जत ने प्यार की जगह ले ली और प्यार के लिए जगह न बची

हम उनसे मिलना चाहते थे और वो हमारी बात मान लेते थे
कुछ ज़्यादा ही मनवा ली अपनी बात, फिर बुलाने की  हिम्मत न बची

हम उनसे सवाल करते थे और वो हमे जवाब देते थे
सवाल जवाब के सिलसिले में उनके पास कहने को बात न बची

हम उनके पास जाना चाहते थे और वो हमसे दूर
पीछा बहुत कर लिया, अब उन तक पहुंचने की राह ना बची

Tuesday, 23 April 2019

परी

ज़िन्दगी से खुशियां मांगी तो मिली नन्ही सी  एक परी
जिसे संभालना एक बहाना था असल में मैं खुद सुधरी
बेगरज़ प्यार जिसे ना आता था, बन गई मैं ममता से भरी
रूखे दिनों में अपनी मुस्कराहट से लाती खुशी की चिंगारी

वक़्त की रफ्तार का अंदाज़ मेरा कुछ कम पड़ गया
देखते ही देखते जैसे वक़्त मुझसे कहीं आगे दौड़ गया जिसकी बड़बड़ से हर शाम और हर दिन था जुड़ गया
अब उसके पास ही वक़्त नहीं , वो कुछ ऐसा मुड़ गया

जिसको कभी समझाते थे ,खुद समझने की कोशिश में हैं
कुछ दूरी ना आ जाए  बीच में कहीं, ये सोचकर गर्दिश में हैं
किसी ना किसी दिन ये होना ही था, कुदरत का उसूल है
दिमाग़ दिल को समझाके थक गया, कोशिश ये फ़िज़ूल है 

Friday, 19 April 2019

उम्मीद

ख्वाबों के सच होने पे भरोसा अब तक करती हूं
ज़िंदा हूं मैं
हकीकत को गिनती तो कब की बेजान हो जाती

परियों की  कहानियों को अब तक मानती हूं
ज़िंदा हूं मैं
वास्तव में देखती तो कब की रूखी हो जाती

कायनात की साज़िश पे अब तक यकीन करती हूं
ज़िंदा हूं मै
असलियत पे गौर देती तो कब की टूट चुकी होती

उम्मीद से ही हर सुबह  आंखें खोलती हूं
ज़िंदा हूं मैं
जो है वो मंज़ूर होती तो कब की मिट चुकी होती

Thursday, 18 April 2019

अपना मानते हैं इसलिए तो ज़ोर डालते हैं
गैरों को तो हमारी दावत ही नसीब नहीं है।
अपना मानते हैं इसलिए तो पीछे पड़ते हैं
गैरों को तो हम पलटके देखते भी नहीं है।

Monday, 15 April 2019

आपको बूंदें पसंद थी तो हम आए बारिश लिए
आपके चेहरे पर मुस्कान की ख्वाहिश लिए
पर किस्मत और वक़्त ने ऐसे साज़िश किए
दिल टूट गया जब आप हमसे धूप की फरमाइश किए।

मैं तो तुम्हारी तरफ़ खींची जा रही हूं , एक दो कदम तुम भी चल लिया करो न बातें शुरू तो हमेशा मैं ही करती हूं , एक बार हाल चाल तुम भी पूछ लिय...