Tuesday, 23 April 2019

परी

ज़िन्दगी से खुशियां मांगी तो मिली नन्ही सी  एक परी
जिसे संभालना एक बहाना था असल में मैं खुद सुधरी
बेगरज़ प्यार जिसे ना आता था, बन गई मैं ममता से भरी
रूखे दिनों में अपनी मुस्कराहट से लाती खुशी की चिंगारी

वक़्त की रफ्तार का अंदाज़ मेरा कुछ कम पड़ गया
देखते ही देखते जैसे वक़्त मुझसे कहीं आगे दौड़ गया जिसकी बड़बड़ से हर शाम और हर दिन था जुड़ गया
अब उसके पास ही वक़्त नहीं , वो कुछ ऐसा मुड़ गया

जिसको कभी समझाते थे ,खुद समझने की कोशिश में हैं
कुछ दूरी ना आ जाए  बीच में कहीं, ये सोचकर गर्दिश में हैं
किसी ना किसी दिन ये होना ही था, कुदरत का उसूल है
दिमाग़ दिल को समझाके थक गया, कोशिश ये फ़िज़ूल है 

Friday, 19 April 2019

उम्मीद

ख्वाबों के सच होने पे भरोसा अब तक करती हूं
ज़िंदा हूं मैं
हकीकत को गिनती तो कब की बेजान हो जाती

परियों की  कहानियों को अब तक मानती हूं
ज़िंदा हूं मैं
वास्तव में देखती तो कब की रूखी हो जाती

कायनात की साज़िश पे अब तक यकीन करती हूं
ज़िंदा हूं मै
असलियत पे गौर देती तो कब की टूट चुकी होती

उम्मीद से ही हर सुबह  आंखें खोलती हूं
ज़िंदा हूं मैं
जो है वो मंज़ूर होती तो कब की मिट चुकी होती

Thursday, 18 April 2019

अपना मानते हैं इसलिए तो ज़ोर डालते हैं
गैरों को तो हमारी दावत ही नसीब नहीं है।
अपना मानते हैं इसलिए तो पीछे पड़ते हैं
गैरों को तो हम पलटके देखते भी नहीं है।

Monday, 15 April 2019

आपको बूंदें पसंद थी तो हम आए बारिश लिए
आपके चेहरे पर मुस्कान की ख्वाहिश लिए
पर किस्मत और वक़्त ने ऐसे साज़िश किए
दिल टूट गया जब आप हमसे धूप की फरमाइश किए।

Friday, 12 April 2019

दोस्ती

किसी को दोस्त मानना बहुत आसान है
बस मान लिया कि वो अपना है
पर जब जाना कि हमारी तो भीड़ में पहचान है
लगा कि दोस्त बनना एक सपना है

दोस्ती सिर्फ साथ की हुई मस्ती नहीं होती
एक दूसरे की बात को जानना है
दोस्त मानने में किसी की  ज़बरदस्ती नहीं होती
वो तो खुद पर खुद मानना है

हम कितनी भी कोशिश कर लें करीब जाने की
थोड़ी सी दूरी तो रह ही जाती है
अब डोर ना पकड़े रहना एक झूठी उम्मीद की
किस्मत में जो मिलना है वो बिना कोशिश मिल ही जाती है

Tuesday, 9 April 2019

सनम

जब तुम मुझसे रूठते हो तो लगता है कुदरत सांस लेना भूल गई है
जब तुम मान जाते हो तो लगता है जन्नत की एक खिड़की खुल गई है
खुदा से कुछ और क्यों मांगे , तुम्हारे साथ  ज़िन्दगी जो मिल गई है

Sunday, 7 April 2019

मितवा

जबसे तुमने कहा हम फिर मिलेंगे
मिलके मंज़िल की तरफ चल पड़ेंगे

घड़ी घड़ी बचे दिनों को गिन रहा हूं मैं
ख्वाबों में ही आने वाले पलों को जी रहा हूं मैं

वो मंज़िल भी क्या मंज़िल जिसका सफर तेरे साथ ना हो
वो ज़िन्दगी भी क्या ज़िन्दगी जिसमें तेरे जैसा मीत ना हो

अब और ना कराओ इंतज़ार
मिलने भी आ जाओ एक बार
मितवा....... मितवा.......

तुमसे मिलके ही तो बदला हूं मैं
गहरे रिश्तों को कुछ कुछ समझा हूं में

वो रिश्ते भी क्या रिश्ते जिनमें हमारे जैसे किस्से ना हो
वो यादें भी क्या यादें जिनका रिश्ता दिल से ना हो

अब समझा हूं तुम्हीं से है खुशी
तुम भी तो समझो दिलनाशीन
मितवा....... मितवा........

इंतज़ार

हमारी गलतियों को माफ करने में इतना भी इंतजार ना कराओ कि वक़्त हो जाए।
मोहब्बत की माफी के इंतजार में हमें इंतज़ार से ही मोहब्बत हो जाए।

मैं तो तुम्हारी तरफ़ खींची जा रही हूं , एक दो कदम तुम भी चल लिया करो न बातें शुरू तो हमेशा मैं ही करती हूं , एक बार हाल चाल तुम भी पूछ लिय...