जिस्म पर थोड़ी सी खरोच क्या अाई
आंसू बेरोक बहने लगे
झूठी मुस्कराहट के पीछे छिपे बूंदों को
आज़ादी जो मिल गई थी।
- गोदा रामकुमार
आंसू बेरोक बहने लगे
झूठी मुस्कराहट के पीछे छिपे बूंदों को
आज़ादी जो मिल गई थी।
- गोदा रामकुमार
मैं तो तुम्हारी तरफ़ खींची जा रही हूं , एक दो कदम तुम भी चल लिया करो न बातें शुरू तो हमेशा मैं ही करती हूं , एक बार हाल चाल तुम भी पूछ लिय...