Friday, 29 March 2019

जिस्म पर थोड़ी सी खरोच क्या अाई
आंसू बेरोक बहने लगे
झूठी मुस्कराहट के पीछे छिपे बूंदों को
आज़ादी जो मिल गई थी।

                                   - गोदा रामकुमार

Wednesday, 27 March 2019

एक लड़की को देखा तो...

वक़्त गुज़ारने की बात नहीं थी, एक झलक जो दिख गई
लफ़्ज़ों में कहने की बात नहीं थी, नज़रों से जो कह गई
सजने सवारने की  बात नहीं थी, मुस्कराहट जो दे गई
जिस्म की  बात नहीं थी, रूह तक जो पहुंच गई।
                                          - गोदा रामकुमार 

Monday, 25 March 2019

मोहब्बत

तुम्हे किसी और के साथ देखूं, मुझमें ये हिम्मत नहीं है
तुम्हारे सामने दिल खोलके रख दूं, मुझे ये इजाज़त नहीं है
हमें साथ लाकर भी दूर रखा , खुदा की रहमत नहीं है
नाकाम मोहब्बत को भुला दूं , ये मेरी फितरत नहीं है।
                                             - गोदा रामकुमार

Sunday, 17 March 2019

प्यार का अहसास

तुमसे बिछड़े कुछ ही घंटे हुए थे
पर अहसास कुछ दिनों के बराबर था।
तुमसे भले ही दर्द और गम मिले थे
पर दिल को याद सिर्फ तुम्हारा प्यार था।

पहले लगा था कि ये प्यार एक चिंगारी है
दूरी की हवा के चलते ही उसे बुझना होगा।
पर ये हवा से और बढ़ने वाली ऐसी आग है
आज नहीं तो कल मुझे ये समझना होगा।

 हर एक बार इस नासमझ ने तुम्हे गलत माना
और सोचा कि तुमसे अलग होना ही सही है।
अकेलेपन में तड़पकर अब इस दिल ने जाना
कि ज़िन्दगी की हर खुशी तुम्हारे पास है और कहीं नहीं है।
     
                                     - गोदा रामकुमार

Saturday, 16 March 2019

एकतरफा प्यार

वो समझे कि हम दूर किसी मंज़िल के पीछे भाग रहे थे
न जान पाए कि उनके साथ सफर ही हमारी मंज़िल थी।

वो समझे कि हम उनको हमेशा के लिए पाना चाहते थे
ना जान पाए कि एकतरफा प्यार में बीते पलों की यादें हमारे लिए काफी थीं।

वो समझे की उनको मनाने की कोशिश में  खुदगर्ज़ी थी
ना जान पाए कि उनको जाने देने में भी हमारी ही मर्ज़ी थी।

वो समझे कि हमसे नफरत करके वो हमे दर्द दिए थे
ना जान पाए कि हम इसी बात से खुश थे कि उनकी ज़िंदगी में हमारी अहमियत तो थी।

                                                                                         - गोदा रामकुमार

सोचा था

सोचा था कि प्यार का अहसास चॉकलेट और फूलों में है
तुझे देखा तो ये जाना अपनों के लिए जीने के उसूलों में है।

सोचा था कि मोहब्बत मोमबत्ती की धीमी रोशनी में है
तुझे देखा तो ये जाना की अंधेरे में राह दिखानी भी है।

सोचा था कि इश्क़ लफ़्ज़ों  से किए इजहार में है
तुझे देखा तो ये जाना की खामोशी में किए दरगुज़र में है।

न जाने क्या क्या सोचकर हम भटक रहे थे शाम सवेरा
तुमने हाथ थामा और हमे मिल गया अपना किनारा।

                                                          - गोदा रामकुमार 

प्यार के पल

माना कि हमने साथ में कुछ ही पल गुज़ारे
पर दिल के बहुत  ही करीब  हैं पल वो सारे।

काश लौट आते वो पल जो हमने साथ में  बिताए
दिमाग़ तो समझ ही गया है पर दिल को कौन समझाए।

दिल में ऐसी जगह बना ली आपने बातों ही बातों में
प्यार को और गहरा बना दिया  कई मुलाकातों ने।

अब उन यादों में हम दिन रात जाग रहे हैं
समुंदर की लहरों की तरह खुद से ही भाग रहे हैं।

पर क्या लहरें समुंदर से बाहर निकल पाती हैं?
कोशिश में लगी बस वापस खींची जाती हैं।

                                                     - गोदा रामकुमार


जुदाई

हमारी नजरें टिकी रही उन पर
आंसुओं की बूदें छिपी रही पलकों पर
दिल से आवाज़ निकली थी उमड़कर
रुक जा ज़रा हमारे लिए पलभर
पर उन्होंने एक बार भी देखा नहीं मुड़कर।

वक़्त को हम कैसे कहते ठहर जा
हम उन्हें थोड़ी देर और देख लें।
ख्वाहिशें हमसे कहने लगी संभल जा
खुद को बिखरने से तू रोक ले।

 वो नहीं रुके आगे चले गए
साथ में हमारा एक हिस्सा ले गए।
अब हम उनके बिना अधूरे लगते हैं
किस्मत के खेल में बस मोहरे लगते हैं।

                                             - गोदा रामकुमार 

सच बता

मैं भी चुप हूं तू भी चुप है
पर सच बता क्या तुम्हारे दिल में भी वो तड़प है ?

लफ्ज़ जो इज़हार नहीं कर पाते
नज़रें थकथी नहीं पल पल दिल को छूते।
पर सच बता क्या तुम्हे डर नहीं लगता इस रिश्ते को खोते ?

क्या कभी बोल पाएंगे दिल की बात?
कि हमे चाहिए हमेशा तुम्हारा साथ।
पर सच बता क्या तुम  मेरे कहने का इंतज़ार नहीं कर रहे  दिन रात ?

कभी आंखों में झांकते तो हो जाता तुम्हारे लिए आसान
वो सारी बातें समझना जो हम शायद कभी ना करे बयान।
पर सच बता क्या तुम्हे अब तक नहीं पता की हम करते हैं तुमसे मोहब्बत बेइंतेहा ?

                                                                  - गोदा रामकुमार 

आज़ादी

अलार्म की घंटी के बाद पाँच मिनट आँखें मूंदे रखने की...
वो जो घड़ी के कांटे से अनजान हो, वैसी सांसे लेने की ..
वो क्या सोचेंगे ये क्या सोचेंगे के ख्यालों से दूर रहने की..
घर के अंदर फुहारों में नहीं ,बरसात और बहारों में नाचने की...
किसी के डर से नहीं , अपने पर से उड़ने के लिए काम करने की..
अपने पसंद के खाने की, दिल भरने तक जीने की...
देर रात तक जागने की, दोस्तों से बतियाने की..
गलती के अहसास के बिना खुशियां लूटने की..
कमज़ोरी के पलों में आँसूं छुपाए बिना टूटने की..
उम्र के लिहाज़ के बिना बचकानियों की...
दस्तूर से नहीं,  फितूर से रिश्तों को निभाने की...

आखिर ये आज़ादी क्या किसी ने हमसे छीना है?
नहीं.. बस हम मानके चल रहे थे कि हमें ऐसे ही जीना है..
आंखें खोलने की देर है.. अपनी ज़िन्दगी है न गैर है। 

                                                            - गोदा रामकुमार 

तेरी यादें

सुबह की चाय पीते सुने गाने की धुन से याद आ गए तुम।
दिन में दोस्तों से की हुई बातों से याद आ गए तुम।
शाम घर लौटते ही दीवार पे टगी तस्वीर से याद आ गए तुम।
रात के सैर की राहों में अनगिनत लम्हों में याद आ गए तुम।

तुम तो मुझसे पूछोगे
क्यों वो गाने सुनते हो?
उन बातों में क्यों खोते हो?
तस्वीर क्यों देखते हो?
उन राहों पे क्यों चलते हो?

हम तो इतना ही कह पाएंगे...
हम तो आपको महसूस करना चाहते थे
फिर हमें लगे कि शायद लौट आगए तुम।

                                              - गोदा रामकुमार 

दिल ए नादान

कभी सोचा नहीं ज़िन्दगी में ऐसा दौर भी होगा...
हर तरफ़ हंसी की झलक मगर सच कुछ और ही होगा।

वैसे तो सबसे घुलमिलके हम बन गए सबके खास...
इतनी इज़्ज़त कमा ली कि जा न सके किसी के पास।

दिल कितना भी बच्चा हो , हम हैं तो दुनिया के लिए बड़े...
न जाने कितनी रातें बिताई हैं हमने ये सोच में पड़े।

चांद को हर कोई देखता है और कहता है सुंदर...
पर अपना मानके लाते नहीं है घर के अंदर।

हमने दिल को समझाया कि तू बेकार ही उम्मीद में है...
न तू किसी के करीब है और वो न ही तेरे नसीब में है।


                                                        - गोदा रामकुमार 

मैं तो तुम्हारी तरफ़ खींची जा रही हूं , एक दो कदम तुम भी चल लिया करो न बातें शुरू तो हमेशा मैं ही करती हूं , एक बार हाल चाल तुम भी पूछ लिय...